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Women in Indian Constituent Assembly (भारतीय संविधान सभा में महिला सदस्य)

Proceedings of Constituent Assembly, as published by the Lok Sabha Secretariat, suggest that fifteen women Members were present throughout the tenure of the Constituent Assembly. These includes Ammu Swaminathan, Annie Mascarene, Begum Aizaz Rasul, Dakshayani Velayudan, G. Durgabai, Hansa Mehta, Kamla Chaudhri, Leela Ray, Malati Chowdhury, Purnima Banerji, Rajkumari Amrit Kaur, Renuka Ray, Sarojini Naidu, Sucheta Kripalani and Vijayalakshmi Pandit. लोकसभा सचिवालय की ओर से प्रकाशित संविधान सभा की कार्यवाही के अनुसार, भारतीय संविधान सभा के कार्यकाल के दौरान पन्द्रह महिला सदस्य उपस्थित थी। इनमें, अमू स्वामीनाथन, एनी मासकरीन, बेगम ऐजाज रसूल, दक्षयनी वेलायुदन, जी दुर्गाबाई, हंसा मेहता, कमला चैधरी, लीला रे, मालती चौधरी, पूर्णिमा बनर्जी, राजकुमारी अमृत कौर, रेणुका रे, सरोजनी नायडू, सुचेता कृपलानी और विजयलक्ष्मी पंडित थी।

महाराणा प्रताप-पंडित नरेन्द्र मिश्र की कविता

राणा प्रताप इस भरत भूमि के, मुक्ति मंत्र का गायक है।
राणा प्रताप आज़ादी का, अपराजित काल विधायक है।।
वह अजर अमरता का गौरव, वह मानवता का विजय तूर्य।
आदर्शों के दुर्गम पथ को, आलोकित करता हुआ सूर्य।।
राणा प्रताप की खुद्दारी, भारत माता की पूंजी है।
ये वो धरती है जहां कभी, चेतक की टापें गूंजी है।।
पत्थर-पत्थर में जागा था, विक्रमी तेज़ बलिदानी का।
जय एकलिंग का ज्वार जगा, जागा था खड्ग भवानी का।।
लासानी वतन परस्ती का, वह वीर धधकता शोला था।
हल्दीघाटी का महासमर, मज़हब से बढकर बोला था।।
राणा प्रताप की कर्मशक्ति, गंगा का पावन नीर हुई।
राणा प्रताप की देशभक्ति, पत्थर की अमिट लकीर हुई।
समराँगण में अरियों तक से, इस योद्धा ने छल नहीं किया।
सम्मान बेचकर जीवन का, कोई सपना हल नहीं किया।।
मिट्टी पर मिटने वालों ने, अब तक जिसका अनुगमन किया।
राणा प्रताप के भाले को, हिमगिरि ने झुककर नमन किया।।
प्रण की गरिमा का सूत्रधार, आसिन्धु धरा सत्कार हुआ।
राणा प्रताप का भारत की, धरती पर जयजयकार हुआ।।

मीडिया विमर्श_media discourse

आखिर फेस बुक पर धार्मिक त्यौहार न बनाने की घोषणा की क्या मायने?
मतलब दीपावली का भी विरोध!
प्रत्यक्ष न सही तो परोक्ष ही...
कुछ टिप्पणियां देखी...
तो मन में सहज जिज्ञासा हुई क्या कोई अधार्मिक त्यौहार क्या होता है?
आखिर जब अंध विरोध तो आँखों के तमस से अधिक मन के कलुष को निकालने की जरुरत होती है!
तथागत बुद्ध ने भी तो "अप्पो दीपो भव" की बात कही थी.

फिर तो न राम के हुए न बुद्ध के...
मन के अँधेरे न जाने कब छटेंगे?

एक प्रस्तावित चैनल की टैग लाइन "यहाँ हर जन पत्रकार है" पर अनायास यह विचार आया कि ऐसे में तो 'कंट्री' के लोगों की बारे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि "यहाँ हर जन राजनीति का जानकार है". अब 'कंट्री' मतबल क्या यह मत पूछियेगा, हम बता नहीं पाएंगे जी...
नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री से बनने से पहले की रोहतक की सैनिक रैली को दिल्ली के एक अंग्रेजी दैनिक ने 'ब्लैक आउट' किया था.  यह पत्रकारिता के किस सिद्धांत के अनुरूप था, यह तो उसके तत्कालीन 'काबिल' संपादक ही जाने!  वह बात दीगर है कि उसे बाद में वहां से भी बड़े बेआबरू होकर निकलना पड़…