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Thursday, July 7, 2016

छिन्नमस्ता_कविता_self to death




अब कोई भूले
तो फिर कैसे कटे रात
अकेले या दुकेले!


पर ऐसा भला
कहाँ होता है जीवन में हर बार
कहो तो जरा!


हर कोई अपना
बोझ लिए सिर पर निकल जाता है
चुपचाप बिना आहट के!


खुशी हो या गम
हो चुकने को तो होना होता है
चुकते तो बस हम है!


मौत की आहट
भला दबे पाँव आने की बात
कही जाती हो!

फिर ऐसे कोई
माने या न माने मेरी बात
सच्चाई कहाँ बदलती है बेबात!


पृथ्वी पर हम
आते हैं गिनती के दिनों के साथ
वापस जाने को!


Thursday, April 7, 2016

क्या है, तेरा नाम_what is your name! (geet)




क्या है, तेरा नाम
न मैंने जाना, न तूने माना
प्यार का था, कैसा फसाना
क्या है...

न मिले तो थे कितने अकेले
मिलकर भी कहाँ हो पाएँ दुकेले
फिर भी कहाँ हो पाया साथ निभाना
क्या है...

अब मिलने की आस, मर गयी है
सूखे पौधे की प्यास, खत्म हो गयी है
दोनों का अहसास, अब है बेगाना
क्या है...

अब जुदा होकर भी जब मिलते हैं
एक थमा वक्त और जुदाई मिलते हैं
हकीकत न होकर, हो कोई फसाना
क्या है...


First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

कोविद-19 ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसका असर जीवन के हर पहलू पर पड़ा है। इस महामारी ने आवागमन के बुनियादी ढांचे को लेकर भी नए सिरे ...