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Monday, June 27, 2016

परंपरा और भाषा से प्रकाश_rising light_tradition_langauage

मेरा कुछ नहीं, मैं तो बस बीन लेता हूँ फूल। 

अपनी परंपरा और भाषा से। 

नए अर्थ-रूप को समझने की कोशिश में। 

अज्ञेय की कविता 'हरा अंधकार' के शब्दों में, "प्रकाश मेरे अग्रजों का है कविता का है, परम्परा का है, पोढ़ा है, खरा है : अन्धकार मेरा है, कच्चा है, हरा है।"

मेरी अल्प बुद्धि-ज्ञान से जो समझ पता हूँ, बता देता हूँ। न मेरा बुद्धिजीवी होने का दावा है न ही बनने की इच्छा। मन होता है सो पढ़ता हूँ, मर्जी होती है सो लिखता हूँ जो समझ में आता है सो साझा कर लेता हूँ। न इससे ज्यादा न इससे कम।

Thursday, March 31, 2016

कवि मन-अज्ञेय_Heart of Poet


Herring Fisher’s Goodbye (1928), Christopher Wood


‘‘आप चीखते हैं, चिल्लाते हैं
अपनी बात फिर दुहराते हैं

मैं इशारा करके मुस्करा देता हूँ
अपना अपना तरीका है

न-न आप नाहक बौखलाते हैं
मैं तो अपनी कह भी चुका-

तो अब विदा लेता हूँ।

(कवि मन, पृ-105)

First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

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