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Wednesday, September 13, 2017
Thursday, September 1, 2016
महाभारत_प्रभाकर क्षोत्रिय
महाभारत द्वारा अनेक रचनाओं को जन्म देने का पहला बड़ा कारण तो यह प्रतीत होता है कि यह एक उदार रचना है जो अपने स्त्रोत से जन्म लेने वाली किसी रचना की स्वायत्तता का हरण नहीं करती, किसी को ‘अनुकरण’ की लज्जा में नहीं बांधती, उलटे सर्जक को देश काल की भिन्नता के बावजूद सृजन की मौलिकता के लिए मुक्त करती है।
संक्षेप में वह लोकतांत्रिक अवकाश (स्पेस) देती है, जो किसी भी स्तर पर ‘धर्मशास्त्र’ कही जाने वाली दुनिया में कोई रचना नहीं देती। (यही वह सबसे बड़ी विभाजक रेखा है, जो दुनिया के दो बड़े सामी धर्मों ‘इस्लाम’ और ‘खिस्त’ से हिंदू धर्म को अलग करती है।) संभवतः इसलिए कि यह धर्म, महाभारत, रामायण जैसी सर्जनात्मक कृतियों से रचा हुआ है, जो धार्मिकता के बहाने लोकचेतना और जीवन की समग्रता के काव्य है।
-प्रभाकर क्षोत्रिय
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