Showing posts with label poem_door_द्वार. Show all posts
Showing posts with label poem_door_द्वार. Show all posts

Sunday, December 24, 2017

poem_door_द्वार





आज घर में रहते हुए
बच्चों के साथ
मैं द्वार नहीं खोलूँगा
न घर के
न मन के

प्रेमिका का पता नहीं
पत्नी है नहीं
एक मन से
एक तन से
दूर है

बीता कल,
आज-प्रतिपल
संतान है, आने वाला कल

बाहर के संघर्ष,
मन की दुविधा से ज्यादा मुश्किल हैं,

संबंधों का ज्ञान
अपरिचितों का अज्ञान
अपना भान
जितना जल्दी हो
उतना बेह्तर!

First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

कोविद-19 ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसका असर जीवन के हर पहलू पर पड़ा है। इस महामारी ने आवागमन के बुनियादी ढांचे को लेकर भी नए सिरे ...