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Monday, November 14, 2016

self learning_अप्पो दीपो भव


शब्द को साधना सहज है पर उससे सीखना और भी कठिन है, सो जिसने मन के एकलव्य को जगा दिया सो उसे स्थानीय गुरु की भी आवश्यकता नहीं। बुद्ध का "अप्पो दीपो भव" सबका जीवन ध्येय वाक्य होना चाहिए।

स्वयं ही सीखने की प्रक्रिया में, गुरु भाव से अधिक सहचर का भाव सिखाता है क्योंकि साहचर्य में सकारात्मकता का स्वाभाविक संयोग बनता है। यही कारण है कि हिन्दू दर्शन में साध-संगत के भाव को आवश्यक माना है।

Sunday, November 13, 2016

मन से चीन्हें अक्षर_Words from heart

मन से चीन्हें अक्षर

दिल की बात कागज़ कभी-कभी ही सटीक उतरती है, वह भी हमसफर के लिए। सो, मन और कलम का सधना भी लोक में अलौकिक की अनुभूति करवा देता है। नहीं तो साहित्य सिर्फ़ अक्षरों और शब्दों की जुगाली भर रह जाता है!

Thursday, March 31, 2016

कवि मन-अज्ञेय_Heart of Poet


Herring Fisher’s Goodbye (1928), Christopher Wood


‘‘आप चीखते हैं, चिल्लाते हैं
अपनी बात फिर दुहराते हैं

मैं इशारा करके मुस्करा देता हूँ
अपना अपना तरीका है

न-न आप नाहक बौखलाते हैं
मैं तो अपनी कह भी चुका-

तो अब विदा लेता हूँ।

(कवि मन, पृ-105)

First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

कोविद-19 ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसका असर जीवन के हर पहलू पर पड़ा है। इस महामारी ने आवागमन के बुनियादी ढांचे को लेकर भी नए सिरे ...