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Wednesday, April 29, 2020

US Auction of Gandhi's Letter_गांधी की चिठ्ठी की नीलामी





'आर. आर. ऑक्शन' कंपनी की वेबसाइट पर नीलामी की लिए उपलब्ध गाँधी की चिठ्ठी

चिट्ठी का स्त्रोत: https://www.rrauction.com/bidtracker_detail.cfm?IN=259

कभी अमेरिका नहीं गए महात्मा गांधी के एक सार्वजनिक चिठ्ठी की बोस्टन शहर में नीलामी है। गाँधी ने नव स्थापित हरिजन सेवक संघ के लिए धन जुटाने के हिसाब से एक चिठ्ठी लिखी थी। पुणे की यरवदा जेल से लिखी सार्वजनिक अपील यही चिठ्ठी अमेरिका में बिक्री के लिए उपलब्ध है।




बोस्टन की नीलामी वाली कंपनी आर आर ऑक्शन की वेबसाइट पर फ्रेम में उपलब्ध चिट्ठी

बोस्टन की 'आर. आर. ऑक्शन' नामक कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर यह चिठ्ठी नीलामी के लिए डाली है। इस चिठ्ठी की बिक्री का न्यूनतम मूल्य पन्द्रह हजार डाॅलर रखा गया है। जबकि नीलामी में भाग लेने की आखिरी तारीख 13 मई है।

'आर. आर. ऑक्शन' की नीलामी वाली वेबसाइट का लिंक
https://www.rrauction.com/bidtracker_detail.cfm?IN=259

नौ अक्तूबर 1932 को एक पेज की आकार (4 X 6.5) वाली अंग्रेजी में गांधी की हस्तलिखित इस चिठ्ठी में एम के गांधी के नाम से हस्ताक्षर हैं।

गांधी इस चिठ्ठी में अपील करते हुए कहते हैं, “प्रिय मित्रों, मैं आपको आपके सहानुभूति वाले पत्र के लिए धन्यवाद देता हूं। इन विषयों को आगे बढ़ाने के हिसाब से घनश्याम दास बिरला की अध्यक्षता में गठित अस्पृश्यता विरोधी संघ को पैसे भेजे जा सकते हैं।” उल्लेखनीय है कि वर्ष 1932 में, गांधी ने भारत की जाति व्यवस्था से अस्पृश्यता की अवधारणा को मिटाने के अपने प्रयासों के तहत अखिल भारतीय अस्पृश्यता विरोधी लीग स्थापित किया था। यह अब हरिजन सेवक संघ के नाम से जाना जाता है।



गाँधी अपने घनिष्ट मित्र-उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला के साथ

गाँधी ने अपने घनिष्ट मित्र और उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला को संस्था का कर्ताधर्ता बनाया। इस समूह के नेक प्रयासों से देश में वंचित वर्गों को मंदिरों, स्कूलों, सड़कों, और पीने के पानी जैसी सार्वजनिक स्थानों की सुविधाओं के उपयोग में सहायता मिली। इससे पहले इन सुविधाओं पर कुछ का ही विशेषाधिकार था। यह चिठ्ठी में गांधी के हिंदू समाज सभी वर्गों को एक साथ लेकर चलने की भूमिका उजागर होती है, जो कि सामान्य रूप से ओझल ही है।



पुणे का आगा खान पैलेस

फोटो स्त्रोत : https://insider.in/aga-khan-palace-pune-maharashtra/event


पुणे की येरवदा जेल (आगा खान पैलेस) में गांधी के उपवास के परिणामस्वरूप हुए ऐतिहासिक पूना पैक्ट के बाद सितंबर 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना हुई थी। वर्ष 1931 में लंदन में हुए दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गांधी ने हिंदू समुदाय के वंचित वर्गों के लिए एक पृथक निर्वाचन समूह बनाने का विरोध किया था। गांधी ने इसे निर्णय को ब्रिटिश सरकार के फूट डालो, विभाजन करो की उसकी नीति के अनुरूप हिंदू समाज को बांटने की एक भयावह कोशिश के रूप में देखा।




दिल्ली स्थित हरिजन सेवक संघ का केंद्रीय कार्यालय

फोटो स्त्रोत : http://www.gandhicreationhss.org

गांधी के कड़े विरोध के बावजूद, ब्रिटिश सरकार ने अगस्त 1932 में, वंचित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन देने के लिए एक कम्यूनल अवार्ड की व्यवस्था की। जबकि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने गांधी के इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील खारिज कर दी।

दिल्ली के किंग्सवे कैंप में स्थित हरिजन सेवक संघ की स्थापना के बाद यहां बना कस्तूरबा-निवास राजधानी में गांधी का दूसरा घर बन गया था। इसके बाद गांधी जब भी दिल्ली प्रवास पर आते थे, वे इसी परिसर में ठहरते थे। यहां तक कि उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी और पुत्र देवदास गांधी इस परिसर में लंबे समय तक रहे।

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