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Monday, January 28, 2019
Saturday, July 7, 2018
water in the old maps of delhi_प्रकृति-पानी की कहानी बताते दिल्ली के नक्शे
आज से लगभग दो सौ साल पहले पुरानी दिल्ली (तब शाहजहांनाबाद) में अंसख्य बागों के साथ पानी की एक बड़ी नहर बहती थी। आज ये दोनों चीजें, बाग और नहर, बीते समय की बात बन कर रह गई हैं क्योंकि अब इनका कोई भौतिक अवशेष बाकी नहीं है। दिल्ली के पुराने नक्शों में झांकने से न केवल दिल्ली के इतिहास बल्कि शहर के पानी, जल निकायों और यमुना नदी से आबादी के अंर्तसंबंधों का पता चलता है। केवल इतना ही पिछली दो शताब्दियों में पानी को लेकर दिल्ली में बदलते समीकरणों का खुलासा भी होता है।
“एंटीक्यूटीस ऑफ दिल्ली” शीर्षक वाला सबसे पुराना रंगीन नक्शा (1803-1857 के बीच में बना) नदियों और नहरों को नीले, बसावट वाले इलाकों को लाल और सड़कों तथा रास्तों को पीले रंग में दर्शाता है। जबकि अंग्रेज सर्वेक्षक एफ एस व्हाईट का बनाया “1807 का दिल्ली के परिवेश” शीर्षक वाले मानचित्र में नीले रंग से नदियों और धाराओं का तो छायांकन चिन्ह से रिज और पहाड़ियों की उपस्थिति को बताया गया है। इस नक्शे की सबसे बड़ी विशेषता एक नहर है, जिसका उद्गम स्थल शाहजहांनाबाद से दर्शाया गया है। यह बात नक्शे के ऊपरी बाईं ओर संकेत रूप में देखने को मिलती है पर अफसोस कि आज की तारीख में इसका कोई अस्तित्व नजर नहीं आता है।
“दिल्ली या शाहजहांनाबाद के पर्यावरण का त्रिभुजीय सर्वेक्षण” शीर्षक वाला मानचित्र वर्ष 1808 की दिल्ली और उसके पास पड़ोस के परिवेश को दर्शाता है। इस नक्शे में खास तौर से यमुना नदी के बाएं ओर के इलाके को प्रदर्शित किया गया है। 1807 के दिल्ली के परिवेश शीर्षक वाले मानचित्र में अब बेकार हो चुकी नहर को प्रमुखता से दिखाते हुए पुरानी नहर बताया गया है। “1812 का दिल्ली की योजना” शीर्षक का नक्शा अंग्रेजों के अधिकार क्षेत्र वाले शाहजहांनाबाद में सैकड़ों बागों की उपस्थिति को दर्शाता है। अब यह बात स्पष्ट नहीं है कि ये बाग शहर के उत्तरी भाग के नजदीक होने की वजह से पनपे या फिर एक कृत्रिम नहर की निकटता के कारण।
“दिल्ली-1857” शीर्षक वाले मानचित्र में यमुना नदी के पूर्वी किनारे से शहर में घुसने के एकमात्र प्रवेश बिंदु के रूप में नौकाओं का पुल का संकेत है जो कि उसके सामरिक महत्व के साथ राजधानी की जल-जीवन रेखा के अस्तित्व को दर्शाता है। इसी अवधि का “1857 में दिल्ली” शीर्षक वाला एक अन्य श्वेत-श्याम नक्शा इस कारण से विलक्षण है कि उसमें दिल्ली की पहाड़ियों और पेड़ों को लाक्षणिक रूप में दर्शाने के साथ नदियों और नहरों को लहरदार लकीरों के रूप में प्रदर्शित किया गया जो कि नक्शों के मामलों में लीक से हटकर बात है।
इसी तरह, “दिल्ली का घेराबंदी” शीर्षक वाला एक महत्वपूर्ण श्वेत-श्याम सैन्य मानचित्र] अँग्रेजी सैन्य व्यवस्था के साथ-साथ दिल्ली रिज की स्थलाकृति को भी दर्शाता है। जबकि “पश्चिमी जमुना नहर” शीर्षक वाला नक्शा अपने नाम को चरितार्थ करते हुए, पूरे दिल्ली क्षेत्र की प्रस्तावित और तैयार सिंचाई नहरों और जल निकासी कार्यों को दिखाता है। तब दिल्ली का विस्तार यमुना नदी के पूर्व से से लेकर बहादुरगढ़ कस्बे के पश्चिम तक था। नक्शे के दाईं तरफ इस विषय में लिखित जानकारी दर्ज है। इस नक्शे में राजधानी के तीन जल स्रोत नीले रंग में अंकित हैं। जिसमें जमुना नदी, दिल्ली नहर और नजफगढ़ झील प्रमुख है। दिलचस्प बात यह है कि शाहजहांनाबाद के हल्के, लाल संकेतक, नक्शे के बीच में ध्यान आकर्षित करते है, जहां से जल प्रवाह की व्यवस्था को इंगित करती लाल रेखाएं शुरू होती हैं। “1807 का दिल्ली के परिवेश” शीर्षक नक्शा में भी इसी जल स्त्रोत के होने की ताकीद करता है।
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