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Thursday, July 28, 2016
Thursday, December 29, 2011
Destination: Poetic lines
मंजिल
बेसबब गुजर गया मुकाम से बिना नजर डाले ।
मंजिल पर थी निगाहें सो नजर आया नहीं कोई ।
दिल में रहता था कोई, इसका हमें गुमान था ।
बसाकर किसी दूसरे का घर, उसने अपने अहसास से भी जुदा कर दिया ।
बेसबब गुजर गया मुकाम से बिना नजर डाले ।
मंजिल पर थी निगाहें सो नजर आया नहीं कोई ।
दिल में रहता था कोई, इसका हमें गुमान था ।
बसाकर किसी दूसरे का घर, उसने अपने अहसास से भी जुदा कर दिया ।
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