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Sunday, October 1, 2017

viginia woolf_वर्जीनिया वूल्फ



कुछ लोग पादरी के पास जाते हैं तो कुछ कविता का सहारा लेते हैं लेकिन मैं अपने दोस्तों के संगत में होती हूं। 

-वर्जीनिया वूल्फ

Sunday, July 31, 2016

देश-कविता-कम्प्यूटर_desh_kavita_computer





लोग कभी-कभी पूछते हैं कि इक्कीसवीं सदी में-कम्प्यूटरों की सदी में-कविता की जरूरत क्या होगी? हमारी स्मृति का परिदृश्य ही हमारे उत्तर में विश्वास का बल भरता है-कि अगर हमें तब अपनी ही कोई जरूरत होगी तो कवन की-काव्य के रचना-कर्म की-भी जरूरत होगी।

-अज्ञेय, (स्मृति और देश)


Monday, June 27, 2016

परंपरा और भाषा से प्रकाश_rising light_tradition_langauage

मेरा कुछ नहीं, मैं तो बस बीन लेता हूँ फूल। 

अपनी परंपरा और भाषा से। 

नए अर्थ-रूप को समझने की कोशिश में। 

अज्ञेय की कविता 'हरा अंधकार' के शब्दों में, "प्रकाश मेरे अग्रजों का है कविता का है, परम्परा का है, पोढ़ा है, खरा है : अन्धकार मेरा है, कच्चा है, हरा है।"

मेरी अल्प बुद्धि-ज्ञान से जो समझ पता हूँ, बता देता हूँ। न मेरा बुद्धिजीवी होने का दावा है न ही बनने की इच्छा। मन होता है सो पढ़ता हूँ, मर्जी होती है सो लिखता हूँ जो समझ में आता है सो साझा कर लेता हूँ। न इससे ज्यादा न इससे कम।

Sunday, March 23, 2014

Double standards of Communists-Dharmvir Bharati (धर्मवीर भारती-कम्युनिस्ट दोमुंही नीति)



यह कहना अधिक उचित होगा कि मार्क्सवाद नहीं बल्कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी राजनीति हमें भारतीय जनता की आशाओं, आकांक्षाओं और संघर्षो से दूर, स्टालिन और मोलोतोव की विदेश नीतियों की मानसिक गुलामी लगने लगी थी।
1942 में जब सारा देश अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़ा हुआ था उस समय ये लोग अंग्रेजों को रूसियों का साथी मानकर अंग्रेज सरकार को जनान्दोलन दबाने में मदद कर रहे थे। वे जनता की बात करते थे पर किस काल्पनिक जनता की, यह हमारी समझ में नहीं आता था। हमारी गली मुहल्ले की जो जनता थी उसका दर्द हम जानते थे।
और शायद इसीलिए हम मार्क्स की मूल स्थापना कि "गरीब अमीर की नाबराबरी मिटनी चाहिए" इससे सहमत थे, पर ये भारतीय कम्युनिस्ट जो बेसिर पैर की जनवादी राजनीति और जनवादी साहित्य नीति बघार रहे थे, वह हमारे लिए अड्डेबाजी में मजाक का विषय बन गयी थी।
उन्होंने उसी समय एक ओर सत्ता और प्रतिष्ठान का संरक्षण स्वीकार करने और दूसरी ओर जनसंघर्ष की बातें करने की जो दोमुंही नीति अपनायी थी उसका दुष्प्रभाव अभी तक स्पष्ट लक्षित होता था।
-धर्मवीर भारती (धर्मवीर भारती की साहित्य साधना)

First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

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