Tuesday, June 28, 2011

कविता

कभी बहुत पहले पीटीआइ के दिनों में एक लिखी कविता की एक लाइन है होने न होने के बीच का अहसास ही कविता को संभव करता है


जिंदगी में मुश्किलों का अंत नहीं था

पर मेरे दोस्तों में भी दम था

दोनों में होड़ थी

कौन किस को पछा़ड़ता है

बिना भागे

जिंदगी से

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