यह बात कम जानी है कि अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता से पूर्व ही सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश को एकरूप देने में रियासतों-रजवाड़ों के राजा-महाराजाओं का अथाह सहयोग प्राप्त किया। यही कारण है कि भारतीय राज्य-व्यवस्था में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान देशी राज्यों का अहिंसक ढंग से किया एकीकरण ही है।
दो वर्ष से कुछ ही अधिक समय में पांच सौ अलग-अलग अटपटे देशीराज्यों के स्थान पर भारत में एक राजनीतिक प्रासाद खड़ा करने में सरदार ने जो भव्य सिद्वि प्राप्त की, उसके चिरस्थायी स्वरूप ने देश की एकता-अखण्डता के निर्माता की उदात्त उपाधि उन्हें दिलाई।
यहां तक कि राजपूताने की रियासतों को आधुनिक राजस्थान के रूप में गठित करने में भी सरदार पटेल की निर्णायक भूमिका थी। आधुनिक राजस्थान-संघ की रचना कई चरणों में हुई। सबसे पहले वर्ष 1948 में मत्स्य-संघ बना, जिसमें अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली के चार राज्य शामिल हुए। फिर उदयपुर, कोटा, बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, किशनगढ़, शाहपुरा और टोंक की रियासतों का संघ बना। वर्ष 1949 में बीकानेर, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर के शासकों ने संघ में सम्मिलित होने का निर्णय किया।
30 मार्च, 1949 को पटेल ने जयपुर में औचारिक रूप से संयुक्त राजस्थान का उद्घाटन किया। इस अवसर उन्होंने कहा कि जयपुर महाराजा साहब (सवाई मानसिंह द्वितीय) को जो राजप्रमुख का मान दिया गया है, उसके लिए मैं उनको मुबारकबाद देना चाहता हूं। आज तक तो यह जयपुर के सेवक थे। क्योंकि असल में हमारे हिन्दुस्तान की संस्कृति के अनुसार राजा राज्य का प्रधान तो जरूर है, लेकिन उससे भी ज्यादा वह प्रजा का सेवक हैं। तो आज तक यह जयपुर की प्रजा के सेवक थे, आज से यह सम्पूर्ण राजस्थान की प्रजा के सेवक बनते हैं। हमारे महा-राजप्रमुख (महाराणा उदयपुर) आज हाजिर नहीं हैं क्योंकि उनकी (महाराणा भूपाल सिंह) शारीरिक दशा हम जानते हैं। पर उनको हम कभी भूल नहीं सकते। राजपूताना का एकीकरण करने के लिए जितना कार्य और जितनी कोशिश राणा प्रताप ने की, उतनी और किसी ने नहीं की। उनका संकल्प परिपूर्ण करने का सौभाग्य आज हम लोगोें को प्राप्त हुआ है, इसलिए आज हमारे अभिमान का दिवस है।
पटेल ने सुनहरे इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि आप के राजपूताना का एक-एक पत्थर वीरता के इतिहास से भरा हुआ है, बलिदान के सुनहले कारनामों से भरा हुआ है। आप के राजपूताना की पुरानी कीर्ति आज भी हमारे दिल को अभिमान, हर्ष और उत्साह से भर देती है। आज से उसी राजस्थान को नई दुनिया के योग्य नया इतिहास बनाने का अवसर प्राप्त होता है, यह कितने सौभाग्य की बात है।
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