Saturday, June 6, 2020

Qutb al-din Mubarak Shah Khilji_Khalifa_दिल्ली का सुल्तान या खलीफा का नायब


कुतुबुद्दीन मुबारक शाह खिलजी का टंका 




दिल्ली सल्तनत काल में खिलज़ी वंश का कुतुबुद्दीन मुबारक शाह खिलजी (1316-20) अकेला ऐसा सुल्तान था, जिसने अपने खुतबे या सिक्कों में खलीफा के प्रति अलग से कोई सम्मान या निष्ठा प्रदर्शित नहीं की। 

उसके अलावा सभी सुल्तानों ने यह दिखावा किया जैसे कि वे खलीफा को ही वैधानिक शासक मानते हैं और वे स्वयं उसके प्रतिनिधि, नायब अथवा सहायक है। यही कारण है कि प्रायः सभी सुलतान खलीफा के नाम को खुतबे और सिक्के में स्थान देते थे।

Wednesday, June 3, 2020

Statue of Umamaheśvara from Tepe_Tap Skandar_तप स्कंधर की उमामहेश्वर मूर्ति





तप स्कंधर की उमामहेश्वर मूर्ति

तप स्कंधरः यह स्थान काबुल के उत्तरी भाग में स्थित है। वर्ष 1970 में जापान के क्योटो विश्वविद्यालय के पुरातत्व मिशन ने इस स्थल पर उत्खनन किया था। यहां दो रहवासी स्थान मिले, जिसमें एक किला और अनेक लघु पुण्य स्थान हैं, जिनमें से एक में अग्नि वेदी है। यहां प्राप्त सबसे महत्वपूर्ण खोज एक संगमरमर की उमामहेश्वर की हिंदू मूर्ति है, जिसके आधार पर संस्कृत का एक शिलालेख उत्कीर्ण है। सातवीं से नौवीं शताब्दी ईस्वी की अवधि के मध्य यह अफगानिस्तान के हिन्दू शाही शासकों का एक महत्वपूर्ण परिसर था। इस परिसर में धार्मिक और नागरिकों के उपयोग वाले भवन एक साथ बने हुए थे।


उमामहेश्वर अनुकृति इस संगमरमर की मूर्ति का वर्ष 1970 में पुरातात्विक खुदाई के दौरान पता चला। यह अभी तक प्राप्त संगमरमर की मूर्तियों में सबसे अधिक संरक्षित मूर्ति है। यह सफेद संगमरमर के एक शिलाखंड से उकेरी गई है, जिसमें चार भुजााओं और तीन नेत्रों वाले भगवान शिव नंदी पर विराजमान हैं। उनके साथ पत्नी पार्वती और अपनी देवी मां के बाईं ओर खड़े स्कंद भी हैं। इस मूर्ति के निचले भाग में ब्राह्मी लिपि/शारदा लिपि के अक्षरों और संस्कृत भाषा में तीन-पंक्ति वाला शिलालेख उत्कीर्ण है। इस पढ़ने लायक शिलालेख के कारण इस मूर्ति का महत्व और भी अधिक हो गया है। यह उत्कीर्णन सूचित करता है कि शिव को महेश्वर का नाम दिया गया है और इसी कारण उनकी अर्धागिनी का नाम उमा है।



अफगानिस्तान के इतिहास में हिन्दूशाही वंश का विशेष महत्व है। चार सौ साल तक इन हिन्दू राजाओं ने अफगानिस्तान से लेकर समूचे पंजाब तक शासन किया। इस राजवंश के 22 शासकों का उललेख मिलता है। कुछ दशक पूर्व जब वयोवृद्ध पत्रकार मनमोहन शर्मा अफगानिस्तान गए थे तो उन्हें काबुल के संग्रहालय में दर्जनों हिन्दू  देवी-देवताओं की मूर्तियां नजर आई थी। उनके लिए हैरानी की बात यह थी कि इन हिन्दू मूर्तियों को संग्रहालय की सूची में बौद्ध मूर्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इस दिशा में जापानी पुरातत्ववेत्ताओं के वर्ष 1970 किए गए पुरातात्विक उत्खनन के परिणामस्वरुप अफ़ग़ानिस्तान में हिन्दुओं के अब तक छिपे सुनहरे इतिहास का नया पक्ष उजागर हुआ है।


उपरोक्त तथ्य "कल्चरल हेरिटेज ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान" और हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार श्री मनमोहन शर्मा के फेसबुक पेज पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर हिंदी में अनुदित की गयी है. 


Monday, June 1, 2020

Bharatvarsh_Amarkosh_अमरकोश_भारतवर्ष





लोकोऽयं भारतं वर्षः शरावत्यास्तु योऽवधेः।
देशः प्राग्दक्षिणः प्रोक्त उदाच्यः पश्चिमोत्तरः।


शरावती (रावी) के दक्षिण-पूर्व का देश प्राच्य है और उत्तर-पश्चिम का उदीच्य। यों भारत के दो भाग थे-उदीच्य और प्राच्य। 



First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

कोविद-19 ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसका असर जीवन के हर पहलू पर पड़ा है। इस महामारी ने आवागमन के बुनियादी ढांचे को लेकर भी नए सिरे ...