Sunday, May 22, 2016

हमारी हिंदी_रघुवीर सहाय (Hamari Hindi_Raghuvir Sahay)




हमारी हिंदी एक दुहाजू की नई बीवी है
बहुत बोलनेवाली बहुत खानेवाली बहुत सोनेवाली

गहने गढ़ाते जाओ
सर पर चढ़ाते जाओ

वह मुटाती जाए
पसीने से गंधाती जाए घर का माल मैके पहुँचाती जाए

पड़ोसिनों से जले
कचरा फेंकने को ले कर लड़े

घर से तो खैर निकलने का सवाल ही नहीं उठता
औरतों को जो चाहिए घर ही में है

एक महाभारत है एक रामायण है तुलसीदास की भी राधेश्याम की भी
एक नागिन की स्टोरी बमय गाने
और एक खारी बावली में छपा कोकशास्त्र
एक खूसट महरिन है परपंच के लिए
एक अधेड़ खसम है जिसके प्राण अकच्छ किए जा सकें
एक गुचकुलिया-सा आँगन कई कमरे कुठरिया एक के अंदर एक
बिस्तरों पर चीकट तकिए कुरसियों पर गौंजे हुए उतारे कपड़े
फर्श पर ढंनगते गिलास
खूँटियों पर कुचैली चादरें जो कुएँ पर ले जाकर फींची जाएँगी

घर में सबकुछ है जो औरतों को चाहिए
सीलन भी और अंदर की कोठरी में पाँच सेर सोना भी
और संतान भी जिसका जिगर बढ गया है
जिसे वह मासिक पत्रिकाओं पर हगाया करती है
और जमीन भी जिस पर हिंदी भवन बनेगा

कहनेवाले चाहे कुछ कहें
हमारी हिंदी सुहागिन है सती है खुश है
उसकी साध यही है कि खसम से पहले मरे
और तो सब ठीक है पर पहले खसम उससे बचे
तब तो वह अपनी साध पूरी करे ।

Saturday, May 14, 2016

History of Delhi through Photographs


















Dancers in a Haveli, Samuel Bourne, Delhi, 1860




The India Gate under construction ( 1921-1931), New Delhi




The official residence of the ‪Viceroy of India‬ before‪ Rashtrapati Bhawan‬ was completed. Now the office of the ‪Vice Chancellor‬ of‪ Delhi University



   Chandni Chowk (18 century, Delhi)

history of name of kankroli_कांकरोली



खांखाडोली के कांकरोली होने की कहानी

खांखा रावत मेवाड़-मारवाड़ में धाड़ा मारते थे। उनकी चारभुजानाथ जी में गहरी आस्था थी। इस कारण एक बार धाड़ा मारने जाते समय उन्होंने चारभुजानाथ में संकल्प लिया कि यदि उन्हें धाड़े में सफलता मिली तो वे मन्दिर निर्माण के साथ पुजारी को डोली देंगे।

खांखा रावत ने सफल धाड़े के बाद मन्दिर बनवाया और पुजारी को डोली दी।
और फिर इस घटना के बाद इस स्थान का नाम खांखाडोली हुआ।

खांखाडोली से खांखरोली और बाद में कांकरोली!
आज का कांकरोली राजसमन्द जिले में है।

First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

कोविद-19 ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसका असर जीवन के हर पहलू पर पड़ा है। इस महामारी ने आवागमन के बुनियादी ढांचे को लेकर भी नए सिरे ...