Friday, November 28, 2014

कविता-अरविन्द जोशी (poem: arvind joshi)




समय के चक्र पर 

नवम्बर महीना गया, 

मानो शरीर बिना छाया, 

और अब

छाया बिना काया, 


हे प्रभु, कैसी है तेरी माया

(बंधु-सखा, अरविन्द जोशी की अंग्रेजी कविता का भावानुवाद)

november drifts so
that once
some
body
with no shadow
is now
some
shadow
with no
body.



Wednesday, November 26, 2014

ब्लॉग पर मेहमान (Two lakh hits on Blog)




आज मेरे ब्लॉग (http://nalin-jharoka.blogspot.in) पर आने वाले मेहमानों की संख्या दो लाख का आंकड़ा पार कर गयी तो लगा सभी बड़ों और दोस्तों से बात साझा करनी चाहिए. 
मजेदार बात यह है कि इसमें से आधे से अधिक अमेरिका से है, उसके आधे भारत से और बाकि दुनिया से. 
इससे लगता है दुनिया कितनी पास है, दूर होते हुए भी. मानो दसों दिशाएं और दूरियाँ बेमानी हो गयी हो. पर यह तो आभासी दुनिया का सच है, वास्तविक जीवन में तो बिना रगड़ खाए और मजबूती से कदम बढाए बिना कुछ भी पाना संभव नहीं.
जिंदगी में दो जमा दो चार नहीं तीन भी हो जाता है वैसे हम तो पांच के लिए भी तैयार होते है, सहर्ष. 

Tuesday, November 25, 2014

विकार_negativity






मुक्ति तो एक से ही है, बहुतों से तो विकार है.....

First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

कोविद-19 ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसका असर जीवन के हर पहलू पर पड़ा है। इस महामारी ने आवागमन के बुनियादी ढांचे को लेकर भी नए सिरे ...