Friday, March 1, 2013

Journalism: Market

आज पत्रकारिता के दौर के एक मित्र से मुलाकात हुई जो अब एक बड़े चैनल का बड़ा नाम है । अच्छा लगा मिलकर । पर बाद में सोचा कि कहीं लेट कर, कहीं लोट कर बस अब यही फलसफा बचा है, पर्दे के पीछे का सच कितना घिघौना है । स्क्रीन की चमक कितनी लुभाने वाली पर कितनी खोखली है मीडिया की दुनिया। हर आदमी दो चेहरे, नहीं अनेक मुखौटे लिए घूम रहा है और मौके को देखकर मुखौटा बदल रहा है । अब सही में अपना सब पढ़ा लिखा भूलने का मन कर रहा है, क्या इसके लिए ही हम बिक रहे हैं या बिकने की तैयारी में है, बस कोई खरीददार तो मिले बाजार में ।

vivekananda on success

"हर काम को तीन अवस्थाओं में से गुज़रना होता है -- उपहास, विरोध और स्वीकृति। जो मनुष्य अपने समय से आगे विचार करता है, लोग उसे निश्चय ही ग़लत समझते है। इसलिए विरोध और अत्याचार हम सहर्ष स्वीकार करते हैं; परन्तु मुझे दृढ और पवित्र होना चाहिए और भगवान् में अपरिमित विश्वास रखना चाहिए, तब ये सब लुप्त हो जायेंगे।"
--- स्वामी विवेकानन्द

Critism:Ageya



आलोचना कई प्रकार की होती है क्योंकि वह कई उद्देश्यों से की जा सकती है । 
सब आलोचना मूल्यवान नहीं होती, उसका उद्देश्य प्रभाव उत्पन्न करना या व्याख्या करना भी हो सकता है । 
-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय

First Indian Bicycle Lock_Godrej_1962_याद आया स्वदेशी साइकिल लाॅक_नलिन चौहान

कोविद-19 ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसका असर जीवन के हर पहलू पर पड़ा है। इस महामारी ने आवागमन के बुनियादी ढांचे को लेकर भी नए सिरे ...