Skip to main content

Love_Sri Aurobindo_प्रेम_महर्षि अरविंद




मनुष्य के ईश्वर से प्रेम करने की उत्कंठा और मनुष्यता से प्रेम करने में असफलता, एक चमत्कार है। भला ऐसे में फिर मनुष्य किससे साथ प्रेम है?
- महर्षि अरविंद 


This is a miracle that men can love God, yet fail to love humanity. With whom are they in love then?
—Sri Aurobindo


Comments

Popular posts from this blog

तीस हजारी, एक भूली बिसरी कहानी_Tis Hazari, a forgotten chapter of capital history

तीस हजारी का नाम आने पर अधिकतर दिल्लीवासियों की आंखों के सामने उत्तरी दिल्ली में एक भीड़भाड़, धूल भरी जिला अदालतों के परिसर का दृश्य उभर आता है। जहां वादियों की भीड़ लगातार अपने असंख्य मामलों, चाहे वे आपराधिक हो या सिविल, के समाधान के लिए जुटी रहती है। लेकिन कुछ ही इस नाम के इतिहास से परिचित हैं। तीस हजारी शब्द “तीस हजार” से निकला है। मुगल साहित्य में इस बात का उल्लेख है कि एक मुगलिया राजकुमारी के कारण आज के तीस हजारी कोर्ट परिसर वाले स्थान पर ही 30,000 पेड़ों वाला एक बड़ा बगीचा लगाया गया था। आज उत्तरी दिल्ली के मोरी गेट बस टर्मिनल, जहां से तीस हजारी कचहरी की ऊंची इमारत दीखती है। वहां कभी शहजादी जहांआरा बेगम ने तीस हजार वृक्षों वाला बाग लगवाया था यहां जो तीस हजारी बाग कहा जाता था। 
“दिल्ली अतीत के झरोखे से” में राज बुद्विराजा लिखती है कि सब्जी मंडी से सगी बहन सी जुड़ी है तीस हजारी। आज के सेंट स्टीफन्स अस्पताल और इर्द गिर्द के इलाके में तीस हजारी बाग हुआ करता था। नीम के वृक्षों, रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियों, फव्वारों और तालाबों वाला कई एकड़ का यह बाग। इससे यह बात तो साफ हो जाती है कि…

Taimur lang_Delhi attack_श्मशान बन गई थी तैमूर की दिल्ली

यदि कोई व्यक्ति यह प्रश्न करे कि दिल्ली के इतिहास में सबसे बुरे वे कौन से दिन थे, जिनमें भारत की यह पुरानी राजधानी अपनी तबाही, बर्बादी, हत्या, लूटमार, बलात्कार, आगजनी और भयंकर सर्वनाश से चीत्कार उठी तो वह तैमूर लंग का समय था।
तैमूरलंग (1336-1405) संसार के क्रूरतम विजेताओं में से था। वह चंगेज खां का वंशज था। उसका पिता अपने कबीले का सरदार था। वह पहला व्यक्ति था जिसका कबीला इस्लाम में धर्मान्तरित हुआ था।
वर्ष 1398 में तैमूर ने भारत पर आक्रमण कर दिया और झेलम-रावी नदियों को पार करता हुआ मुल्तान, दियालपुर, पाकपटन, भटनेर, सिरसा और कैथल को लूटता हुआ दिल्ली पहुंचा। यहाँ हौज खास के पास उसने अपने डेरे डाले और सफदरजंग के मकबरे के पास लड़ाई हुई।
दिल्ली के तुगलक सुल्तान महमूद तुगलक की सेना को हराकर यह 18 दिसंबर 1398 को दिल्ली के अंदर घुस गया और 15 दिन दिल्ली में रहा। महमूद डरकर उस समय गुजरात भाग गया। एक तरह से, तैमूरलंग के आक्रमण का सामना तुगलक सुल्तान ने नहीं दिल्ली की जनता ने किया।
इस बीच तैमूर की सेना ने कई दिनों तक दिल्ली को लूटा और कत्लेआम के बाद एक लाख लोगों को कैदी बना लिया। दिल्ली के सुल्तान…

Women in Indian Constituent Assembly (भारतीय संविधान सभा में महिला सदस्य)

Proceedings of Constituent Assembly, as published by the Lok Sabha Secretariat, suggest that fifteen women Members were present throughout the tenure of the Constituent Assembly. These includes Ammu Swaminathan, Annie Mascarene, Begum Aizaz Rasul, Dakshayani Velayudan, G. Durgabai, Hansa Mehta, Kamla Chaudhri, Leela Ray, Malati Chowdhury, Purnima Banerji, Rajkumari Amrit Kaur, Renuka Ray, Sarojini Naidu, Sucheta Kripalani and Vijayalakshmi Pandit. लोकसभा सचिवालय की ओर से प्रकाशित संविधान सभा की कार्यवाही के अनुसार, भारतीय संविधान सभा के कार्यकाल के दौरान पन्द्रह महिला सदस्य उपस्थित थी। इनमें, अमू स्वामीनाथन, एनी मासकरीन, बेगम ऐजाज रसूल, दक्षयनी वेलायुदन, जी दुर्गाबाई, हंसा मेहता, कमला चौधरी, लीला रे, मालती चौधरी, पूर्णिमा बनर्जी, राजकुमारी अमृत कौर, रेणुका रे, सरोजनी नायडू, सुचेता कृपलानी और विजयलक्ष्मी पंडित थी।