Sunday, November 24, 2013

Life: A poem






कभी जिंदगी के साथ तू भी गुनगुना
कभी जिंदगी के साथ तू भी मुस्कुरा

माना की गम हैं बहुतेरे
मुश्किलें भी कम नहीं है, घेरे
दिल में फिर भी बढ़ने कि तमन्ना है
कभी जिंदगी के साथ तू भी गुनगुना
कभी जिंदगी के साथ तू भी मुस्कुरा

खोने-मिटने के डर को भगाना है
पहुँचना है सबके साथ, डाले हाथों में हाथ
फिर चाहे कितनी भी अँधेरी हो रात
कभी जिंदगी के साथ तू भी गुनगुना
कभी जिंदगी के साथ तू भी मुस्कुरा

हासिल करना है, 
जी-ते-जी, यही पाना है
एक रास्ता है, एक सफ़र है, 
कभी जिंदगी के साथ तू भी गुनगुना
कभी जिंदगी के साथ तू भी मुस्कुरा

फिर भी मंजिल पर नजर है
कि कभी तो ख़त्म होगी
जिंदगी कि ये दुश्वारियां
कभी जिंदगी के साथ तू भी गुनगुना
कभी जिंदगी के साथ तू भी मुस्कुरा

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