Thursday, May 1, 2014

prostitute (वेश्या-अमृतलाल नागर, सुहाग के नूपुर)



‘‘वेश्या पूरे तौर पर कभी किसी के अधिकार में नहीं आती ! उस पर अधिकार प्राप्त करने की भावना ही मृग-मरीचिका है। उसका आकर्षण अनंत है।’’

राजा के गले की माला कुलीन वरवधुओं के कंठ में ही पड़ती है.....

-अमृतलाल नागर(सुहाग के नूपुर)

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