Saturday, January 18, 2014

Hindi Area (हिंदी प्रदेश की व्यापकता)


बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ तक। कितने शब्दों में कितनी बार. हर राज्य के व्यक्ति की हिंदी में उसकी बोली का रंग है, उसके क्षेत्र का असर है। समूचे हिंदी प्रदेश में बोलियों से बनता है हिंदी का इंद्रधनुष। आखिर गांधी-पटेल के गुजरात से लेकर शिवाजी-नामदेव-आंबेडकर के महाराष्ट तक हिंदी की संपर्क की शक्ति से कौन भला मना कर सकता है।
आज सुदूर दक्षिण में भी कन्याकुमारी तक वाया कर्नाटक, आंध्र प्रदेश चाहे मुम्बई के हिंदी सिनेमा और रोजगार के कारण ही सही पर हिंदी का प्रभाव और विस्तार बढ़ा है । यही कारण है कि राजस्थान के भीतरी भागों, ढाणियों और गावों में, रमन महर्षि के केरल की नर्सों की उपस्थिति सर्वमान्य रूप से नज़र आती है।
‘हिंदी जाति की अवधारणा’ रामविलास शर्मा की महत्वपूर्ण स्थापनाओं में से एक है। उन्होंने सर्वाधिक बल अपनी इसी मान्यता पर दिया। इसीलिए अपने जीवन के अंतिम वर्षों में लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति और हिंदी प्रदेश’ में जहाँ वे अपनी कई स्थापनाओं में फेर बदल करते हैं, वहीं ‘हिंदी जाति की अवधारणा’ को और बल प्रदान करते हैं।
हिंदी में इस आधार पर जाति निर्माण की बात रामविलास शर्मा से पहले भारतेंदु हरिश्चंद्र ‘जातीय संगीत’ नामक निबंध में करते हैं। इसके बाद महावीर प्रसाद द्विवेदी, प्रेमचंद, निराला, राहुल सांकृत्यायन आदि ने हिंदी जाति के निर्माण के लिए किस तरह से संघर्ष किया इसका उल्लेख रामविलास शर्मा अपनी पुस्तक ‘हिंदी जाति की अवधारणा’ में विस्तार से करते हैं।
वे लिखते हैं कि “भारतेंदु ने ‘जातीय संगीत’ नाम के निबंध में प्रदेशगत संगीत की चर्चा की थी, किसी पेशेवर बिरादरी के संगीत की नहीं। श्यामसुन्दर दास सम्पादित जनवरी 1902 की ‘सरस्वती’ में कार्तिक प्रसाद के लेख का शीर्षक था - ‘महाराष्ट्रीय जाति का अभ्युदय’। जाति और साहित्य के बारे में महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 1923 के साहित्य सम्मलेन के कानपुर अधिवेशन में कहा था- ‘जिस जाति विशेष में साहित्य का अभाव, उसकी न्यूनता देख पड़े आप यह निसंदेह निश्चित समझिए कि वह जाति असभ्य किंवा अपूर्ण सभ्य है।’ अतः स्पष्ट है कि रामविलास शर्मा की महत्ता इसमें नहीं है कि उन्होंने ‘हिंदी जाति की अवधारणा’ का मौलिक सिद्धांत दिया, बल्कि महत्ता इसमें है कि इन्होंने हिंदी जाति को संगठित करने के लिए उसे विकसित करने का प्रयास किया।
आज भी हिंदी क्षेत्र राजनीतिक रूप से विभाजित है, जबकि इसका क्षेत्र उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तक विस्तृत है।
रामविलास शर्मा अपनी पुस्तक ‘भाषा और समाज’ में अन्य देशों की जातीय भाषा के साथ तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर दिखाते है कि ‘जातीय भाषा का गठन और प्रसार’ किस तरह होता है। चीन का उदाहरण देते हुए वे लिखते हैं कि “हिंदी भाषी क्षेत्र में बोलियों की जैसी भिन्नता है, वैसी ही और उससे अधिक भिन्नता चीनी भाषी प्रदेश में है। पेकिंग की बोली के आधार पर हाँ जाति की भाषा का प्रसार अभी भी हो रहा है।” पेकिंग व्यापार का प्रसिद्ध केन्द्र रहा है, साथ ही यह चीन नगर की राजधानी रहा है। दिल्ली भी व्यापारिक और राजनीतिक जीवन का केन्द्र और भारत की राजधानी रही है। इसीलिए दिल्ली/मेरठ की बोली (खड़ी बोली) का प्रसार संभव हो सका।
रामविलास शर्मा ने अपने अध्ययन में यह विस्तारपूर्वक दिखाया है कि जातीय भाषा का प्रसार, जातीय प्रदेश का गठन एक लंबी प्रक्रिया है, जिसकी शुरुआत बहुत पुरानी है। जातीय निर्माण की यह प्रक्रिया हिन्दुस्तान में अंग्रेजों के आने से बहुत पहले शुरू की जाती है। उनका मत है कि “ईस्वी तेरहवीं सदी में हिंदी जाति का निर्माण आरम्भ हो चुका है। ब्रज और खड़ी बोली के जनपदों में सामान्य आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का इतना प्रसार हो गया है कि एक जनपद का कवि दूसरे जनपद की भाषा में कविता करता है और उसे दोनों जनपदों के लोग समझ सकते हैं।”
जाति का गहरा संबंध भाषा से होता है। दरअसल एक ही भाषा बोलनेवाले लोग मिलकर ही जाति का निर्माण करते हैं। जब गण टूट जाते हैं, तो लोगों को जोड़नेवाला तत्व भाषा ही रह जाता है।
जब यह बोध काफी प्रबल हो जाता है, तो महाजाति का निर्माण होता है। हिंदी, तमिल, गुजरात डा. शर्मा की शब्दावली में महाजातियां हैं।
वे कहते हैं कि आज सभी भारतीय भाषाओं और उनके बोलनेवालों का असली दुश्मन हिंदी नहीं बल्कि अंग्रेजी है। अंग्रेजी सभी भारतीय भाषाओं और उनके बोलनेवालों को, यानी भारतीय राष्ट्र का निर्माण करनेवाली सभी महाजातियों को घुन की तरह कमजोर कर रही है। यदि सभी भारतीय भाषाओं को यह बात ठीक प्रकार से समझाई जा सके, तो वे हिंदी को अपनी बहन मानेंगे और उसके साथ सहयोग करते हुए अंग्रेजी को इस देश से हटाने में पूरा सहयोग करेंगे। इससे हमारा राष्ट्र और भी मजबूत हो उठेगा।

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