Saturday, June 25, 2016

Mera Dhan hai swadhin kalam_gopal singh nepali मेरा धन है स्वाधीन कलम_गोपाल सिंह नेपाली





राजा बैठे सिंहासन पर, 
यह ताजों पर आसीन कलम 
मेरा धन है स्वाधीन कलम
जिसने तलवार शिवा को दी रोशनी 
उधार दिवा को दीपतवार थमा दी लहरों को
ख़ंजर की धार हवा को दी
अग-जग के उसी विधाता ने, 
कर दी मेरे आधीन कलम 
मेरा धन है स्वाधीन कलम
रस-गंगा लहरा देती है
मस्ती-ध्वज फहरा देती है
चालीस करोड़ों की भोली किस्मत 
पर पहरा देती है 
संग्राम-क्रांति का बिगुल यही है, 
यही प्यार की बीन कलम
मेरा धन है स्वाधीन कलम
कोई जनता को क्या लूटे
कोई दुखियों पर क्या टूटे
कोई भी लाख प्रचार करे
सच्चा बनकर झूठे-झूठे
अनमोल सत्य का रत्‍नहार, 
लाती चोरों से छीन कलम
मेरा धन है स्वाधीन कलम
बस मेरे पास हृदय-भर है
यह भी जग को न्योछावर है
लिखता हूँ तो मेरे आगे
सारा ब्रह्मांड विषय-भर है
रँगती चलती संसार-पटी, 
यह सपनों की रंगीन कलम
मेरा धन है स्वाधीन कलम
लिखता हूँ अपनी मरज़ी से
बचता हूँ क़ैंची-दर्ज़ी से
आदत न रही कुछ लिखने की
निंदा-वंदन ख़ुदग़र्ज़ी से
कोई छेड़े तो तन जाती, 
बन जाती है संगीन कलम
मेरा धन है स्वाधीन कलम
तुझ-सा लहरों में बह लेता
तो मैं भी सत्ता गह लेता
ईमान बेचता चलता 
तो मैं भी महलों में रह लेता
हर दिल पर झुकती चली मगर, 
आँसू वाली नमकीन कलम
मेरा धन है स्वाधीन कलम


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