Sunday, January 20, 2013

Tulsidas-Ram

क्या छब बरनो आजु की भले बने हौ नाथ।
तुलसी मस्तक कब निवै धनुष बाण लेव हाथ।।
कृष्ण, निश्चय तुम भी विष्णु ही के अवतार हो लेकिन मैं तो सिर तब ही झुकाऊँगा जब धनुष-बाण हाथ में लेकर तुम चित्रकूट के रमते राम बन जाओ ।
(चित्र साभार: राजा रवि वर्मा)

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