पहाड़ तो बस खड़ा ही रह जाता है, नदी से बह निकलती है । अपने दोनों तरफ जिन्दगी को हरा भरा खुशहाल करते हुए। अविचल और चलायमान का अंतर स्थूल और सूक्ष्म की दृष्टि से देखने पर ही भासित होता है । पहाड़ की तरह अड़कर खड़े रहने की बजाय नदी की तरह हर स्थिति में गतिमान होना ज्यादा बेहतर है।
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